एक भव्य, आलीशान उड़नयान आकाश में सरकते हुए बाई कुल की विशाल जागीर की ओर उतर रहा था।
उस यान पर चू वंश का प्रतीक चिन्ह अंकित था, जो निर्जन स्वर्ग साम्राज्य के सर्वाधिक शक्तिशाली कुलीन परिवारों में से एक था।
यान के अगले भाग पर खड़ी चू जियान नीचे फैले बाई कुल की जागीर को निहार रही थी, उसकी लाल आँखें शांत थीं किंतु उनमें हल्की-सी प्रसन्नता भी झलक रही थी।
हवा ने उसके वस्त्रों को खींचा और लंबे काले केश उसके पीछे लहरा उठे।
यहाँ आए कई वर्ष हो गए। और अब मैं बाई जिहान की मंगेतर बनकर लौट रही हूँ। किसने सोचा होगा?
उसने मन ही मन मुस्कुरा दिया।
समस्त संभावनाओं में यह एक ऐसी संभावना थी जिसकी उसने कल्पना नहीं की थी।
बाई जिहान के साथ अपनी पहली भेंट को याद करते हुए उसकी उँगलियाँ कमर पर बँधी तलवार की मूठ पर फिरती रहीं।
एक नौ वर्ष का बिगड़ैल बालक, जिसमें अत्यधिक अहंकार था, आत्मज्ञान का सर्वथा अभाव था और स्वयं को अजेय समझने की एक विचलित करने वाली प्रवृत्ति थी।
खैर, वह एक अच्छा खिलौना था।
उसके होंठों से हल्की-सी हँसी निकल गई।
उसे उसकी औकात दिखाने के लिए बस कुछ ही प्रहार पर्याप्त थे।
उसे स्मरण आया कि कैसे वह एक अति-आत्मविश्वासी युवा स्वामी से एक दयनीय छोटे सेवक में बदल गया था, जिसे उसकी चाय परोसने और प्रत्येक आदेश का पालन करने के लिए बाध्य किया जाता था।
दो सप्ताह तक वह उसका निजी सेवक बना रहा था।
उस समय भी वह उससे कहीं अधिक शक्तिशाली थी। बहुत अधिक।
और अब?
मुझे आश्चर्य है। क्या उसमें कोई परिवर्तन आया होगा?
उसे किसी न किसी प्रकार इस पर संदेह था।
उसने हेवन स्वॉर्ड सेक्ट में बाई जिहान जैसे अनेक व्यक्तियों को देखा था, जो ऐसी शक्ति के नशे में चूर थे जो वास्तव में उनकी नहीं थी। यद्यपि वह उन सबमें सर्वाधिक कमज़ोर था।
यान बाई कुल के प्रांगण में सुचारू रूप से उतरा। बाई कुल के अनेक वृद्धजन और सेवक पहले से ही उसके स्वागत के लिए प्रतीक्षारत थे।
चू जियान ने बड़े सलीके से यान से कदम रखा।
उसकी उपस्थिति प्रभावशाली होने के साथ-साथ सहज भी थी। आत्मविश्वास और शक्ति की एक अनिर्वचनीय आभा उसे घेरे हुई थी।
वृद्धजनों ने आदरपूर्वक सिर झुकाया।
"महोदया चू, बाई कुल में आपका स्वागत है।"
उसने सहमति में सिर हिलाया।
"आतिथ्य की सराहना करती हूँ।"
एक सेवक आगे बढ़ा।
"महोदया चू, आपके प्रवास के दौरान आपके लिए एक कक्ष तैयार किया गया है। क्या आप पहले विश्राम करना चाहेंगी, अथवा युवा स्वामी से मिलना पसंद करेंगी?"
उसने हाथ हिलाकर बात टाल दी।
"बाद में विश्राम कर लूँगी। अभी मुझे बाई ज़ुएकिंग के पास ले चलो।"
सेवक हिचकिचाया।
"महोदया ज़ुएकिंग इस समय प्रशिक्षण ले रही हैं। क्या आप अभी भी मिलना चाहेंगी?"
"हाँ।"
सेवक ने सिर हिलाया और आगे-आगे चलने लगा।
प्रशिक्षण के दौरान दूसरों को बाई ज़ुएकिंग को बाधित करने की अनुमति नहीं थी, लेकिन यदि मामला चू जियान का हो तो बात अलग थी।
चू जियान बाई कुल के तलवार प्रशिक्षण मैदान में पहुँची, जहाँ हेवन स्वॉर्ड सेक्ट की उभरती हुई प्रतिभा बाई ज़ुएकिंग तलवारबाजी का अभ्यास कर रही थी।
बाई ज़ुएकिंग की प्रत्येक गतिविधि तीव्र, सटीक और घातक थी।
उसकी तलवार रेशम के फटने जैसी ध्वनि के साथ वायु को चीरती हुई गुज़री और अपने पीछे तलवार के संकल्प के धुंधले निशान छोड़ गई।
चू जियान ने आगे बढ़ने से पूर्व कुछ क्षण तक देखा।
"लगता है तुम अब भी उतनी ही तीव्र हो जितनी पहले थीं।"
बाई ज़ुएकिंग ने प्रहार करते-करते बीच में ही रुककर दृष्टि उस परिचित आवाज़ की ओर घुमाई।
जब उसने चू जियान को देखा, तो उसके सामान्यतः शीतल रहने वाले मुखमंडल पर एक दुर्लभ मुस्कान आ गई।
"जियान।"
उसने तलवार म्यान में रखी और आगे बढ़ी।
"सुना था कि आ रही हो, लेकिन इतनी शीघ्र आने की आशा नहीं थी।"
चू जियान ने कंधे उचका दिए।
"मेरे कुल के वृद्धजन चाहते हैं कि मैं बाई कुल के साथ यह विषय शीघ्र निपटा लूँ।"
बाई कुल के पास चू कुल के साथ गठबंधन का एक सुदृढ़ कारण था, लेकिन चू कुल के लिए भी यही बात सत्य थी, शायद उससे भी अधिक।
उनके प्रतिद्वंद्वियों को अन्य तीन सर्वाधिक शक्तिशाली कुलों में से दो का समर्थन मिल रहा था और उनकी स्थिति संकुचित होती जा रही थी।
इसलिए उन्हें आशा थी कि स्थिति और बिगड़ने से पूर्व चू जियान शीघ्र ही बाई जिहान के साथ सगाई को अंतिम रूप दे दे।
बाई ज़ुएकिंग की तीखी दृष्टि थोड़ी सिकुड़ गई।
"तुम्हारा काम?"
बाई ज़ुएकिंग ने उलझन में पूछा।
उसे नहीं लगता था कि चू जियान दोनों कुलों के बीच के मामलों में हस्तक्षेप करने के लिए पर्याप्त परिपक्व है। वह स्वयं भी ऐसा करने की स्थिति में नहीं थी।
चू जियान मुस्कुराई।
"क्या? तुम्हें मुझ पर विश्वास नहीं?"
बाई ज़ुएकिंग ने बाहें मोड़ लीं।
"तुम्हें जानते हुए, मुझे लगता है कि तुम यहाँ किसी महत्वपूर्ण काम से नहीं आई हो।"
चू जियान खिलखिलाकर हँसी।
"हो सकता है?"
वह आगे बढ़ी और बाई ज़ुएकिंग के कंधे पर हाथ रख दिया।
"मेरे पास तुम्हारे लिए एक शुभ समाचार है।"
बाई ज़ुएकिंग ने भौंहें उठाईं।
"क्या समाचार?"
चू जियान की मुस्कान और चौड़ी हो गई।
"अब मैं तुम्हारी बड़ी बहन बनूँगी।"
मौन।
बाई ज़ुएकिंग ने पलकें झपकाईं, पहले उसे बात पूरी तरह समझ नहीं आई।
और तब उसके मुखमंडल पर उदासी छा गई।
"तुम्हारा मतलब यह तो नहीं?"
चू जियान ने सिर हिलाया।
"बिल्कुल सही। तुम्हारे और मेरे कुल ने मिलकर मेरी शादी तुम्हारे प्यारे छोटे भाई से तय कर दी है।"
वह थोड़ा आगे झुकी, उसकी आँखों में शरारत झलक रही थी।
"तो अब से तुम मुझे 'बड़ी बहन जियान' कहकर बुलाओगी।"
बाई ज़ुएकिंग के होंठ हिंसक रूप से फड़कने लगे।
एक पल के लिए वह पूरी तरह अवाक रह गई।
चू जियान से उसने जितनी बातें सुनने की आशा की थी, उनमें यह आखिरी थी।
बाई ज़ुएकिंग या उस बैठक के बाहर उपस्थित किसी भी व्यक्ति को बाई जिहान और चू जियान की सगाई के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
और सगाई की आधिकारिक घोषणा होने तक इस विषय को गोपनीय रखा जाना था।
बाई ज़ुएकिंग को केवल इतना ही बताया गया था कि चू जियान शीघ्र ही बाई कुल का भ्रमण करने वाली है, इससे अधिक कुछ नहीं।
"आप मजाक कर रही हैं।"
"नहीं।"
"क्या आप सच कह रही हैं?"
"बहुत।"
बाई ज़ुएकिंग ने गहरी साँस छोड़ी और कनपटी रगड़ी।
यदि चू जियान का विवाह उसके भाई से हो रहा होता तो वह प्रसन्न होती, काश बाई जिहान उसका भाई न होता।
उसकी आवाज़ धीमी थी।
"क्या तुम सचमुच उस चिड़चिड़े बालक से विवाह करने जा रही हो?"
चू जियान मुस्कुराई।
"हूँ।"
बाई ज़ुएकिंग ने अपनी सखी को काफी देर तक घूरकर देखा, मानो उसमें किसी भी प्रकार की हिचकिचाहट का संकेत ढूंढ रही हो।
कोई नहीं था।
"क्यों?"
चू जियान ने सिर झुकाया।
"क्यों नहीं?"
बाई ज़ुएकिंग का मुख घूम गया।
"क्योंकि वह बाई जिहान है।"
यही एक कारण अधिकांश लोगों के लिए उससे विवाह से बचने के लिए पर्याप्त होना चाहिए था।
चू जियान ने हल्की-सी हँसी ली।
"बिल्कुल सही। वह एक मूर्ख है।"
"तो क्यों?"
"मुझे लगता है यह मज़ेदार होगा और मुझे तुम्हारी बड़ी बहन बनने का अवसर मिलेगा।"
बाई ज़ुएकिंग ने आँखें बंद कर लीं और नासिका से साँस छोड़ी।
उसके मन का एक भाग कहना चाहता था कि मैं स्वयं यह सगाई तोड़ दूँगी।
लेकिन वह जानती थी कि यह इतना सहज नहीं था।
यह विवाह केवल बाई जिहान और चू जियान के बीच का नहीं था, बल्कि उनके दोनों कुलों के बीच एक गठबंधन था।
इसके अतिरिक्त इससे उत्तराधिकारी के रूप में बाई जिहान की स्थिति भी सुदृढ़ हो सकती थी।
यद्यपि वह उसे विशेष पसंद नहीं करती थी, फिर भी वह उसका भाई था और वह जानती थी कि यह वैवाहिक गठबंधन उसके लिए अत्यंत लाभकारी हो सकता है।
लेकिन क्या जियान वास्तव में इससे सहमत थी?
बाई ज़ुएकिंग ने सिर हिलाया।
उसे सिरदर्द होने लगा था।
"जो भी हो। यदि तुम वाकई ऐसा करना चाहती हो, तो मैं तुम्हें नहीं रोकूँगी।"
चू जियान मुस्कुराई।
"अच्छा। तो फिर कह दो।"
बाई ज़ुएकिंग ने भौंहें चढ़ाईं।
"क्या कहना?"
"तुम्हें पता है क्या।"
"नहीं।"
चू जियान की आँखों में शरारत भरी चमक थी।
"मुझे बड़ी बहन कहो।"
बाई ज़ुएकिंग के मुखमंडल पर उदासी छा गई।
चू जियान खिलखिलाकर हँसी।
"अरे, चिंता मत करो। बाद में कहने के लिए बहुत समय है। आखिरकार, अब हम परिवार हैं।"
बाई ज़ुएकिंग ने चू जियान को घूरकर देखा जो बाई जिहान से विवाह के लिए दृढ़संकल्पित लग रही थी।
"मैं अब अपने होने वाले मंगेतर से मिलने जाऊँगी, छोटी बहन।"
Login to comment.