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चैप्टर ८: श्रम का तूफान
रोहन ने अभी तक श्रावणी की वादी नहीं हुई थी, लेकिन उन्होंने उसकी सहमति के बिना उसके साथ समय बिताना शुरू कर दिया था। वह श्मशान घाट में उसके पास समय बिताने के लिए जाता था, जहाँ वह उसे दूध और अन्य वस्तुएँ देता था। श्रावणी ने उनकी नजदीकी की अनुमति दी थी, लेकिन उनके पास श्रावणी के साथ एक गहरा संबंध होने का कोई पूरा फैसला नहीं था।
एक दिन, जब रोहन श्मशान घाट में से गुजर रहा था, उसने एक अजीब आवाज सुनी, जो उसके साथी श्रावणी की तरह थी, लेकिन उसकी आवाज में कुछ अलग था। वह रोहन की ओर देखा, लेकिन जब उसने उसकी दिशा में देखा, तो वह गया था। रोहन ने सोचा कि वह श्रावणी की एक और दोस्त हो सकती थी, और उसने उसकी ओर बढ़ा।
"कौन हो? तुम कौन हो?" रोहन ने पूछा, लेकिन जब उसने जवाब दिया, तो उसकी आवाज ने उसकी आत्मा को हिला दिया। यह आवाज क्रूरता और शक्ति से भरी थी, जो रोहन को पहले कभी नहीं सुनाई थी।
"मैं तुम्हारी पत्नी हूँ, रोहन। तुम्हारी एक सच्ची वादी हूँ।" यह आवाज एक अजीब सी महिला की थी, जिसकी आँखें भूतों की तरह चमक रही थीं। वह एक पुरानी स्त्री थी, जिसकी त्वचा काली थी और जो कुछ भी काम में थी, वह बहुत भयानक लग रही थी।
रोहन ने उसकी ओर देखा, लेकिन जब उसने उसकी आँखों में देखा, तो वह हिचकिचाहट महसूस की। वह श्रावणी को क्यों नहीं मानता था, जो उसकी सबसे अच्छी दोस्त थी? लेकिन जब उसने इस नए प्रतिद्वंद्वी को देखा, तो उसने सोचा कि श्रावणी के साथ उसका संबंध शायद केवल एक सामान्य दोस्ती ही थी।
"तुम कौन हो?" रोहन ने फिर से पूछा, लेकिन जब उसने जवाब दिया, तो उसकी आवाज में क्रूरता और शक्ति और भी ज्यादा की गई थी। यह आवाज एक अजीब सी महिला की थी, जो उसके जीवन को बदलने के लिए तैयार थी।
रोहन ने अब तक श्रावणी के साथ केवल एक दोस्ती का संबंध था, लेकिन अब उसे पता चल गया था कि उसके जीवन में एक नया वास्तविकता आ गई है। यह नया वास्तविकता उसके जीवन को बदलने के लिए तैयार थी, और रोहन इसे स्वीकार करने के लिए तैयार था।
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