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Chapter 3
📚 श्मशान की रानी – Queen of the Cremation Grounds

Chapter 3

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चैप्टर 3: सामान्य जीवन की छाया में रोहन ने अपने पिता की दुकान में एक दिन का काम पूरा कर लिया था। वह अपने चारपाई पर लेटकर अपने पैरों को उठाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन दर्द के कारण वह इसे पूरा नहीं कर सका। किरण ने उसे दूध दिया था और उसकी मां की ओर से भी एक छोटी सी दाल मिली थी, जो उनके लिए खाने के लिए पर्याप्त थी। रोहन ने अपने पैरों को एक साफ़ गमछे से ढक दिया और अपने हाथों को अपनी भुजाओं पर रखकर आराम करने की कोशिश की। किरण ने मौका देखा और रोहन के सिर पर एक हल्का सा स्पर्श किया। "तुम ठीक हो क्या?" उसने पूछा। रोहन ने अपने सिर को उसकी ओर घुमाया और मुस्कराया। "हाँ, मैं ठीक हूँ। बस थोड़ा दर्द हो रहा है।" किरण ने उसकी बात सुनी और उसके पास बैठ गई। "मैं चिंतित हूँ, रोहन। तुम्हारे पिता ने तुम्हें यह जॉब दी, लेकिन तुम्हारा हाथ अभी भी नहीं ठीक हो रहा है।" रोहन ने उसकी बात को समझा और अपने पैरों को दोबारा उठाने की कोशिश की। इस बार दर्द थोड़ा कम था, लेकिन अभी भी वह पूरा उठा नहीं सका। रोहन ने किरण को देखा और उसकी बातचीत को रोकने के लिए कहा। "ठीक है, किरण। मैं ठीक हूँ। बस मुझे थोड़ा समय दो।" किरण ने उसकी बात सुनी और उसके पास से उठ गई। रोहन ने अपने पैरों को एक साफ़ गमछे से ढक दिया और अपने हाथों को अपनी भुजाओं पर रखकर आराम करने की कोशिश की। जब किरण कमरे से बाहर गई, तो रोहन ने अपने दिमाग में एक सवाल उठाया। क्या वह इसी तरह का जीवन जीना चाहता है? दुकान में काम करना और घर पर आराम करना? उसके दिमाग में एक सवाल पैदा हुआ कि उसके पिता ने उसे यह जॉब देने का कारण क्या था। क्या यह सच में उसके लिए था या कुछ और? रोहन ने अपने दिमाग को साफ़ करने की कोशिश की, लेकिन उसे यह सवाल जाता नहीं था। वह किरण के साथ बाहर गया, जो कि दुकान के बाहर खड़ी थी। "तुम क्या कर रही हो?" रोहन ने पूछा। किरण ने उसकी ओर मुड़ी और मुस्करायी। "मुझे लगता है कि तुम्हारी मां कोई खाना बनाना चाह रही है। मैं जा रही हूँ, तुम्हारी मदद करने के लिए।" रोहन ने उसकी बात सुनी और अपने सिर को उसकी ओर घुमाया। "ठीक है, किरण। धन्यवाद।"
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