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श्रावणी का रहस्य: दूसरा स्वा...
📚 श्मशान की रानी – Queen of the Cremation Grounds

श्रावणी का रहस्य: दूसरा स्वाद

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शरीर में दर्द और दिमाग में कोमलता के साथ, रोहन श्मशान घाट से निकल गया। वह अपने पिता की दुकान में पहुँच गया, जहाँ किरण ने उसकी बीमारी के बारे में पूछा। रोहन ने उसे बताया कि वह श्मशान घाट में गया था और वहाँ से आया था, लेकिन किरण को उसकी सच्चाई समझ नहीं आई। "आज मुझे बहुत बुरा लगा," रोहन ने कहा, "मुझे लगा कि मैं मर जाऊंगा।" किरण ने उसकी बात नहीं मानी, "तुम्हें आज कुछ बुरा नहीं लगा, तुम मुझसे बात कर रहे हो, ना?" रोहन ने सोचा कि किरण को उसकी सच्चाई समझना मुश्किल है, इसलिए वह उसे अपने अनुभव के बारे में बताने का फैसला किया। लेकिन पहले, वह श्रावणी से मिलना चाहता था, जो उसके दिल में एक अजीब सी जगह बना चुकी थी। रोहन ने अपने पिता की दुकान को छोड़ दिया और श्मशान घाट की ओर चला गया। जब वह वहाँ पहुँचा, तो उसने कुसुम को देखा, जो पहली बार उसके साथ बात करने के लिए तैयार थी। "कुसुम, मैं तुम्हारी दोस्त हूँ, ना?" रोहन ने कहा। "नहीं, तुम मेरा पत्रिका हो, रोहन," कुसुम ने कहा, "लेकिन मैं तुम्हारी दोस्त बनने की कोशिश कर रही हूँ।" रोहन ने उसकी बात मानी और कुसुम से बात करने लगा। वह उसके बारे में जानने के लिए उत्सुक था, लेकिन कुसुम ने उसके प्रश्नों का जवाब नहीं दिया। "क्यों?" रोहन ने पूछा, "क्या तुम मेरे साथ साझा करने को तैयार नहीं हो?" "मैं तुम्हारे साथ साझा करने को तैयार हूँ, लेकिन मेरे पास बहुत कुछ नहीं है, रोहन," कुसुम ने कहा, "श्रावणी ही मेरी सबकुछ है।" रोहन ने सोचा कि श्रावणी उसके लिए क्या है, वह भी नहीं जानता। लेकिन उसने महसूस किया कि वह श्रावणी से जुड़ाव रखता है, और वह उसके पास वापस जाना चाहता था। "कुसुम, मैं श्रावणी से मिलना चाहता हूँ। तुम मेरी मदद करोगी?" रोहन ने कहा। कुसुम ने उसकी बात सुनी और हामी की। रोहन ने उसके साथ श्मशान घाट की ओर चलना शुरू किया, लेकिन वह नहीं जानता था कि श्रावणी उसे क्या कहेगी।
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