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चैप्टर ६: श्मशान की गहराइयों में
रोहन श्मशान घाट के अंदर चला गया, जहाँ श्रावणी ने उसे ले जाने के बाद उसे छोड़ दिया था। वह एक अजीब सी शांति का अनुभव कर रहा था, जैसे कि वह किसी अन्य दुनिया में था। वहाँ एक पेड़ खड़ा था, जिसकी छाया श्मशान घाट के पानी में गिर रही थी। रोहन ने पेड़ की दिशा में कदम बढ़ाया और एक पत्थर को उठाकर उसे पेड़ के पास रख दिया।
"श्रावणी, तुम मुझे यहाँ क्यों ले आई?" रोहन ने सवाल किया।
"श्रावणी नहीं, रोहन," एक अजीब सी आवाज़ आई, "मैं तुम्हारी पत्रिका हूँ। श्मशान घाट की एक शक्तिशाली स्त्री हूँ, जो तुम्हारे पास आई हूँ।"
रोहन ने पीछे मुड़कर देखा, लेकिन वहाँ कोई नहीं था। वह एक अजीब सी स्त्री को देख रहा था, जो पेड़ के पीछे खड़ी थी। वह एक पारंपरिक साड़ी पहने हुए थी और उसके बाल एक सुंदर टांग बने हुए थे।
"कौन हो तुम?" रोहन ने आगे बढ़कर पूछा।
"मैं तुम्हारी मित्र हूँ, रोहन," स्त्री ने कहा, "जिसका नाम है कुसुम। श्रावणी ने मुझे तुम्हारे बारे में बताया है। तुम्हारी जिज्ञासा और अदम्य भावना ने मुझे आकर्षित किया है।"
रोहन ने कुसुम की दिशा में कदम बढ़ाया, जो उसकी ओर आ गई और उसकी आँखों में एक अजीब चमक देखी।
"कुसुम, तुम श्रावणी से जानती हो?" रोहन ने पूछा।
"हाँ, रोहन," कुसुम ने कहा, "मैं श्रावणी की एक पुरानी दोस्त हूँ। हम दोनों ने श्मशान घाट में अपने जीवन की शुरुआत की है।"
रोहन ने कुसुम के बारे में और पूछा, लेकिन कुसुम ने कुछ नहीं कहा। वह एक अजीब सी स्थिति में थी, जहाँ वह अपने आप को श्मशान घाट से जोड़ रही थी।
रोहन ने कुसुम को देखा और समझ गया कि वह श्रावणी के एक साथी है। वह एक नए ज्ञान की ओर बढ़ रहा था, जो श्रावणी के रहस्य को समाप्त कर देगा। लेकिन रोहन को पता नहीं था कि वह इस ज्ञान के लिए कितना भुगतान करना होगा।
दोनों ने एक दूसरे की आँखों में झांका, और रोहन समझ गया कि वह एक नए खतरे के सामने खड़ा है। लेकिन वह जानता था कि वह इस खतरे का सामना करने के लिए तैयार है।
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