Chapter 1
Bloody marry
Rudra: The Ghost Hunter
“खूनी सगाई”
12 जुलाई 2020
अमेरिका — एरिज़ोना के बाहरी इलाके में स्थित एक पुराना विला।
रात के ठीक 3 बजकर 17 मिनट।
वह समय… जब दुनिया की ज्यादातर आत्माएँ सोती हैं —
और बाकी जाग जाती हैं।
विला के अंदर चार युवक एक गोल दर्पण के सामने खड़े थे।
कमरे में सिर्फ मोमबत्तियाँ जल रही थीं।
हवा बिल्कुल स्थिर थी।
इतनी स्थिर… कि साँस लेने की आवाज भी भारी लग रही थी।
"भाई, आखिरी बार पूछ रहा हूँ… पक्का करना है?"
रोहन ने काँपती आवाज में कहा।
अमन हँसा।
"डर गया क्या? बस तीन बार बोलना है — Bloody Mary… Bloody Mary… Bloody Mary…"
तीसरा लड़का, जैक, मोबाइल से वीडियो बना रहा था।
"यह वीडियो वायरल होगा।"
चौथा लड़का चुप था।
उसकी नजर दर्पण पर टिकी हुई थी।
अजीब बात यह थी कि…
उसे अपना reflection थोड़ा देर से blink करता दिखा।
"तुम लोगों ने notice किया?" उसने फुसफुसाया।
"क्या?"
"आईना… थोड़ा अलग behave कर रहा है…"
अमन झल्लाया।
"बस करो यार!"
उसने मोमबत्ती उठाई।
चारों दर्पण के सामने खड़े हुए।
एक साथ बोले—
"Bloody Mary…"
कुछ नहीं हुआ।
वे हँसे।
दूसरी बार—
"Bloody Mary…"
मोमबत्ती की लौ अचानक लंबी हो गई।
जैसे हवा नीचे से ऊपर की ओर बह रही हो।
तीसरी बार—
"BLOODY MARY."
…
खामोशी।
फिर—
टप…
टप…
टप…
जैक ने नीचे देखा।
फर्श पर लाल बूंदें गिर रही थीं।
"यह क्या है?"
उसने ऊपर देखा।
दर्पण से…
खून टपक रहा था।
अगले ही सेकंड—
दर्पण के अंदर एक चेहरा उभरा।
लेकिन वह उनका reflection नहीं था।
वह किसी और का था।
एक औरत।
उसकी आँखें नहीं थीं।
सिर्फ काले गड्ढे।
उसका मुँह अस्वाभाविक रूप से चौड़ा था।
जैसे जबड़ा टूट चुका हो।
और फिर…
वह मुस्कुराई।
मोमबत्तियाँ एक साथ बुझ गईं।
कमरे में अंधेरा छा गया।
उस रात…
चारों की लाशें मिलीं।
लेकिन सबसे डरावनी बात?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लिखा था—
"मौत का कारण — अत्यधिक भय."
उनके शरीर पर एक भी चोट नहीं थी।
लेकिन उनके चेहरे…
ऐसे जमे हुए थे जैसे उन्होंने मौत को आते हुए देखा हो।
23 जून 2021
मध्य प्रदेश के बीहड़।
एक पूरा गाँव रातों-रात खाली।
घर खुले।
खाना चूल्हे पर।
दरवाजे आधे।
लेकिन इंसान — गायब।
सिर्फ एक चीज मिली।
हर घर की दीवार पर…
लाल हाथों के निशान।
छोटे।
जैसे किसी दुल्हन ने लगाए हों।
18 जनवरी 2022
पश्चिमी घाट।
एक luxury resort।
108 लोग।
एक ही रात।
मृत।
CCTV में कुछ नहीं।
दरवाजे अंदर से बंद।
और जंगल से आती एक आवाज…
जिसे बाद में लोगों ने नाम दिया—
"रोती हुई दुल्हन."
और अब…
रामगढ़।
भारत।
"काली पहाड़ी" सोसाइटी।
लोग कहते थे —
यह जमीन कभी श्मशान थी।
लेकिन builders ने पैसे के लिए सब दबा दिया।
हड्डियाँ।
राख।
इतिहास।
सब।
पर कुछ चीजें दबती नहीं।
वे इंतजार करती हैं।
रुद्र प्रताप अपनी कुर्सी पर बैठा था।
उसकी आँखें कंप्यूटर स्क्रीन पर जमी थीं।
व्हाट्सएप ग्रुप — "रहस्यमयी दुनिया"
उसने टाइप किया—
【पिछले तीन दिनों में मेरी बिल्डिंग में पाँच हत्याएँ हो चुकी हैं।】
Send.
मैसेज गिरा…
और ग्रुप explode हो गया।
【मजाक कर रहे हो?】
【पुलिस?】
【भूत है भाई!】
रुद्र मुस्कुराया।
उसे यह reaction पसंद था।
डर की गंध…
उसे हमेशा से आकर्षित करती थी।
ग्रुप एडमिन — गुरुजी — का मैसेज आया:
【वहाँ से निकल जाओ। कुछ जगहें इंसानों के लिए नहीं होतीं।】
रुद्र ने reply नहीं किया।
वह खिड़की तक गया।
नीचे अफरा-तफरी थी।
लोग भाग रहे थे।
सूटकेस।
बच्चे।
रोती औरतें।
एक आदमी चिल्ला रहा था—
"यह बिल्डिंग अपशकुनी है!"
तीन दिन।
पाँच मौतें।
सब अलग तरीके से।
लेकिन एक चीज common थी—
मरने से पहले हर व्यक्ति ने कहा था…
"दुल्हन आ गई…"
रुद्र ने जेब से वह कागज निकाला।
लाल।
गाढ़ा।
जैसे ताजा खून।
उस पर लिखा था—
दूल्हा — रुद्र प्रताप
उसकी कोई मंगेतर नहीं थी।
फिर भी…
उसे शादी का निमंत्रण मिला था।
कल रात।
जब वह सो रहा था।
कुछ उसके सीने पर गिरा।
आँख खुली।
यह पत्र था।
और जैसे ही उसने छुआ—
उसके दिमाग में आवाज गूँजी।
[SYSTEM ACTIVATED]
Host: Rudra Pratap
Age: 20
Remaining Lifespan: 365 Days
Ability: Prana Absorption
Skill: Kaal Bhairav Blade Art — 6/10
पहला reaction?
Shock नहीं।
Excitement।
क्योंकि रुद्र… सामान्य इंसान नहीं था।
उसे बचपन से मौत के किस्से fascinate करते थे।
जब दूसरे बच्चे cartoons देखते थे…
वह cremation ground की कहानियाँ पढ़ता था।
उसने अपनी जिंदगी के 60 साल sacrifice करके यह skill खरीदी थी।
अब उसके पास सिर्फ 1 साल था।
लेकिन…
उसे डर नहीं लगा।
बल्कि—
उसे purpose मिला।
"अगर मरना ही है…
तो शिकारी बनकर मरूँगा।"
उसने धीरे से फुसफुसाया—
"आओ… दुल्हन."
रात।
8 बजे।
टिक…
टिक…
टिक…
घड़ी की आवाज असामान्य रूप से तेज लग रही थी।
फिर—
खटाक!
बिजली चली गई।
पूरा फ्लैट अंधेरे में डूब गया।
उसी पल—
पत्र गर्म होने लगा।
इतना… कि जेब के पार त्वचा जलने लगी।
सर… सर… सर…
कागज फड़फड़ा रहा था।
जैसे जीवित हो।
रुद्र ने गंडासा उठाया।
उसकी धार अंधेरे में भी चमक रही थी।
"मैं इंतजार कर रहा हूँ…"
15 मिनट।
30 मिनट।
कुछ नहीं।
लेकिन उसकी sixth sense चीख रही थी—
तुम अकेले नहीं हो।
उसने emergency lamp जलाया।
और तभी…
दीवार पर उसकी परछाई दिखी।
लेकिन…
उसके पीछे…
एक और।
धीरे-धीरे।
लंबी।
टेढ़ी।
मानो हड्डियाँ गलत जगह जुड़ी हों।
वह परछाई उसके movement को copy नहीं कर रही थी।
वह खुद चल रही थी।
उसके हाथ…
रुद्र की गर्दन की ओर बढ़ रहे थे।
एक सेकंड।
बस एक सेकंड दूर—
रुद्र पलटा।
और मुस्कुराया।
"मिल गई."
गंडासा हवा में उठा।
और पूरी ताकत से—
नीचे गिरा।
लेकिन…
धार कुछ छूने से पहले—
उसके कान के पास एक फुसफुसाहट आई।
इतनी ठंडी…
कि खून जम जाए।
"दूल्हे…
इतनी जल्दी क्या है?"
रुद्र की मुस्कान पहली बार हल्की सी जमी।
क्योंकि…
वह आवाज—
उसके पीछे से नहीं…
उसके ठीक सामने से आई थी।
लेकिन वहाँ…
कोई नहीं था।
लैंप अचानक बुझ गया।
अंधेरे में…
दो लाल बिंदु खुले।
जैसे आँखें।
और फिर—
किसी ने उसके गाल को छुआ।
बर्फ से भी ठंडा।
SYSTEM चमका—
⚠️ High-Level Spirit Detected
रुद्र की पकड़ गंडासे पर और मजबूत हो गई।
उसने धीरे से कहा—
"अच्छा है…
जितनी खतरनाक दुल्हन… उतनी लंबी उम्र."
अंधेरे में…
हँसी गूँजी।
लेकिन वह इंसानी नहीं थी।
और तभी—
उसके सामने एक आकृति बनने लगी…
सफेद लहंगा…
घसीटता हुआ…
खून से भीगा…
और चेहरा…
घूँघट में।
जैसे ही घूँघट थोड़ा उठा—
रुद्र की आँखें फैल गईं।
क्योंकि…
वह चेहरा…
उसने पहले देखा था।
लेकिन कहाँ?
"घूँघट के पीछे"
कमरे में फैला अंधेरा अब सामान्य अंधेरा नहीं था। वह भारी था… जैसे हवा में किसी अनदेखे डर का वजन घुल गया हो।
रुद्र बिल्कुल स्थिर खड़ा था।
उसकी सांसें नियंत्रित थीं, लेकिन दिल सामान्य से धीमा धड़क रहा था। यह डर की वजह से नहीं था — बल्कि उसके शरीर की आदत थी। जब भी खतरा सामने आता, उसका शरीर खुद को युद्ध की अवस्था में ले जाता।
उसके सामने खड़ी आकृति धीरे-धीरे स्पष्ट होने लगी।
सफेद लहंगा फर्श पर घिसट रहा था।
लेकिन वह सफेद अब सफेद नहीं रह गया था। जगह-जगह गहरे लाल धब्बे थे — जैसे कपड़े को खून में भिगोकर फिर सूखने के लिए छोड़ दिया गया हो।
कमरे का तापमान अचानक गिर चुका था।
रुद्र की सांस से हल्की धुंध निकल रही थी।
फिर…
उस आकृति ने एक कदम आगे बढ़ाया।
आवाज नहीं हुई।
जैसे उसके पैर जमीन को छू ही नहीं रहे हों।
रुद्र ने गंडासे की पकड़ और मजबूत कर ली।
उसके दिमाग में सिस्टम की आवाज फिर गूंजी —
High-Level Spirit detected.
Threat probability: Extremely Dangerous.
रुद्र के होंठों पर हल्की मुस्कान आई।
"अच्छा है…" उसने मन ही मन सोचा, "जितना बड़ा खतरा… उतना बड़ा इनाम।"
आकृति अब उससे सिर्फ तीन कदम दूर थी।
घूँघट अभी भी उसके चेहरे को ढके हुए था।
लेकिन घूँघट के नीचे कुछ हिल रहा था।
जैसे अंदर हवा नहीं… बल्कि कोई चीज रेंग रही हो।
अचानक वह रुकी।
कमरे में सन्नाटा और गहरा हो गया।
फिर एक बेहद धीमी आवाज आई —
"दूल्हे…"
आवाज इतनी पास से आई कि रुद्र की गर्दन की नसें तन गईं।
लेकिन उसके चेहरे पर डर नहीं था।
उसने जवाब दिया, "दुल्हन… चेहरा दिखाओ। शादी बिना देखे नहीं करता मैं।"
कुछ सेकंड तक कुछ नहीं हुआ।
फिर…
उसने अपना दायां हाथ उठाया।
हाथ बेहद पतला था।
त्वचा राख जैसी धूसर।
और उंगलियां… अस्वाभाविक रूप से लंबी।
उस हाथ ने धीरे से घूँघट पकड़ा।
और ऊपर उठाया।
रुद्र की पुतलियां फैल गईं।
चेहरा…
वह आधा सुंदर था।
और आधा… भयानक।
चेहरे का दाहिना हिस्सा एक बेहद खूबसूरत युवती का था। गोरी त्वचा, बड़ी आंख, हल्के लाल होंठ।
लेकिन बायां हिस्सा…
त्वचा पूरी तरह फटी हुई।
जैसे किसी ने मांस नोच लिया हो।
उस तरफ की आंख नहीं थी।
सिर्फ एक काला गड्ढा।
जिसके अंदर कुछ हिल रहा था।
रुद्र ने ध्यान से देखा।
वह कीड़े थे।
छोटे सफेद कीड़े।
जो उसके चेहरे के अंदर रेंग रहे थे।
फिर भी…
वह मुस्कुरा रही थी।
"क्या मैं सुंदर नहीं हूँ… दूल्हे?"
रुद्र ने बिना पलक झपकाए कहा, "तुम्हें देखकर लगता है शादी के बाद मेकअप पर काफी खर्च आएगा।"
कुछ पल के लिए कमरा पूरी तरह शांत हो गया।
फिर…
वह हंसी।
लेकिन वह हंसी किसी इंसान की नहीं थी।
उसमें कई आवाजें मिली हुई थीं।
जैसे दर्जनों लोग एक साथ हंस रहे हों।
अचानक वह गायब हो गई।
रुद्र की आंखें सिकुड़ गईं।
उसने तुरंत पीछे वार किया।
गंडासा हवा चीरता हुआ गया।
टन्न!
जैसे लोहे से टकराया हो।
एक तीखी चीख कमरे में गूंजी।
और वह फिर दिखाई दी।
इस बार छत पर।
उसका शरीर उल्टा चिपका हुआ था।
गर्दन पूरी तरह मुड़ी हुई।
वह उसे घूर रही थी।
अब उसकी खूबसूरत वाली आंख भी पूरी काली हो चुकी थी।
सिस्टम फिर चमका —
Spirit hostility increasing.
Danger level rising.
अगले ही पल…
वह टूटकर नीचे गिरी।
नहीं…
गिरी नहीं।
झपटी।
उसकी गति इंसानी आंखों से तेज थी।
लेकिन रुद्र पहले ही तैयार था।
उसने एक कदम साइड लिया।
गंडासा तिरछा घुमाया।
धार उसके कंधे से गुजरी।
इस बार साफ महसूस हुआ।
कुछ कटा था।
फर्श पर काले रंग का तरल गिरा।
वह खून नहीं था।
उससे सड़ांध की गंध आ रही थी।
दुल्हन पीछे हट गई।
उसका चेहरा अब गुस्से से विकृत था।
"तुम… मुझे चोट कैसे पहुँचा सकते हो?"
रुद्र ने शांत आवाज में कहा, "मैं कसाई का औजार यूं ही नहीं लाया। इसमें मौत की आदत है।"
वह गुर्राई।
कमरे की खिड़कियां अचानक खुल गईं।
तेज हवा अंदर घुस आई।
लैंप टूटकर फर्श पर गिर गया।
अब सिर्फ बाहर से आती हल्की चांदनी बची थी।
और उसी चांदनी में…
रुद्र ने देखा —
उसके पीछे…
एक नहीं…
तीन और आकृतियां खड़ी थीं।
सबने दुल्हन का जोड़ा पहना था।
सबके चेहरे घूँघट में थे।
उसने धीरे से सांस छोड़ी।
"तो बारात भी लाई हो…"
अचानक चारों उसकी ओर बढ़ीं।
रुद्र ने तुरंत निर्णय लिया।
सीधी लड़ाई बेवकूफी होती।
उसने अपनी प्राण ऊर्जा जगाई।
उसकी नसों में जैसे आग दौड़ गई।
काल-भैरव तलवार विद्या सक्रिय।
उसकी पकड़ बदल गई।
अब वह गंडासा नहीं पकड़ रहा था…
जैसे हथियार उसका हिस्सा बन गया हो।
पहली दुल्हन झपटी।
रुद्र नीचे झुका।
घुटने के बल घूमकर वार किया।
धार उसके पैरों से गुजरी।
उसका शरीर धुएं में बदल गया।
लेकिन बाकी तीन रुकने वाली नहीं थीं।
एक ने पीछे से पकड़ लिया।
उसका स्पर्श…
बर्फ से भी ठंडा।
रुद्र के शरीर की गर्मी तेजी से खिंचने लगी।
सिस्टम चेतावनी देने लगा —
Life force draining.
रुद्र ने दांत भींचे।
और बिना देखे पीछे वार कर दिया।
चीख।
पकड़ ढीली हुई।
उसी पल सामने वाली ने उसका गला पकड़ लिया।
उसका चेहरा अब कुछ इंच दूर था।
उसके मुंह से काला तरल टपक रहा था।
"अब तुम हमेशा मेरे रहोगे…"
रुद्र की सांस रुकने लगी।
लेकिन…
वह मुस्कुराया।
धीरे से बोला —
"यही गलती सब करते हैं… मुझे कमजोर समझने की।"
अचानक उसके शरीर से गर्म लहर निकली।
प्राण ऊर्जा विस्फोट।
दुल्हन पीछे उछल गई।
रुद्र ने मौका नहीं छोड़ा।
पूरी ताकत से ऊपर से वार किया।
धार उसके सिर से नीचे तक चली गई।
इस बार वह धुएं में नहीं बदली।
वह जमीन पर तड़पने लगी।
सिस्टम चमका —
Spirit severely damaged.
Prana available for absorption.
रुद्र आगे बढ़ा।
जैसे ही उसने हाथ बढ़ाया…
बाकी दो दुल्हनों ने एक साथ चीख मारी।
इतनी तेज…
कि कांच चटक गए।
और फिर —
कुछ अप्रत्याशित हुआ।
फर्श पर पड़ी घायल दुल्हन मुस्कुराने लगी।
उसका शरीर पिघलने लगा।
और धीरे-धीरे…
बाकी दोनों उसमें समाने लगीं।
रुद्र की आंखें सिकुड़ गईं।
"Fusion…?"
कुछ ही सेकंड में…
वह पहले से दोगुनी बड़ी हो चुकी थी।
उसका मुंह अब सामान्य से तीन गुना खुल चुका था।
रीढ़ बाहर उभरी हुई।
उंगलियां पंजों जैसी।
सिस्टम की आवाज पहले से ज्यादा गंभीर थी —
Warning.
Elite Spirit manifesting.
इस बार…
रुद्र ने भी पहली बार महसूस किया —
यह लड़ाई आसान नहीं होगी।
और तभी…
वह चीज मुस्कुराई।
"अब शादी सच में शुरू हुई है… दूल्हे।"
"प्राण का सौदा"
कमरे की दीवारें हल्के-हल्के कांप रही थीं।
जैसे पूरी इमारत उस चीज की मौजूदगी से डर रही हो।
रुद्र ने अपनी सांसों को स्थिर किया। उसके सामने खड़ी वह विकृत दुल्हन अब किसी एक आत्मा जैसी नहीं लग रही थी। उसका शरीर बार-बार आकार बदल रहा था। कभी उसकी गर्दन लंबी हो जाती, कभी हाथ जमीन तक लटकने लगते, कभी चेहरा फटकर दो हिस्सों में बंट जाता और फिर वापस जुड़ जाता।
यह सिर्फ एक प्रेत नहीं था।
यह कई अधूरी मौतों का मेल था।
रुद्र के दिमाग में सिस्टम की आवाज फिर गूंजी —
Elite Spirit confirmed.
Recommended action: Immediate retreat.
Survival probability: 27 percent.
रुद्र हल्का सा हंसा।
"भागना होता… तो यहां रुकता ही क्यों?"
दुल्हन ने सिर टेढ़ा किया। उसकी काली आंखें सीधे रुद्र के भीतर झांकती सी लगीं।
"तुम अलग हो… बाकी दूल्हों जैसे नहीं। वे तो मुझे देखते ही मर गए थे।"
रुद्र ने तुरंत उस शब्द को पकड़ लिया।
"बाकी दूल्हे?"
दुल्हन की मुस्कान और चौड़ी हो गई।
अचानक कमरे की हवा बदल गई।
रुद्र के आसपास का दृश्य धुंधला होने लगा।
दीवारें गायब…
फर्श गायब…
और अगले ही पल —
वह एक दूसरे स्थान पर खड़ा था।
एक पुराना विवाह मंडप।
चारों ओर जली हुई लकड़ियां।
आधा टूटा हुआ हवन कुंड।
हवा में राख उड़ रही थी।
रुद्र ने तुरंत समझ लिया।
"माया…"
दुल्हन की आवाज हर दिशा से आई —
"यह मेरा घर था… मेरी शादी की रात।"
अचानक दृश्य बदल गया।
मंडप में लोग दिखाई देने लगे।
हंसते हुए।
नाचते हुए।
ढोल की आवाज।
फिर…
आग भड़क उठी।
किसी ने चीख मारी।
कुछ ही सेकंड में खुशी का माहौल नरक में बदल गया।
लोग भाग रहे थे।
दुल्हन — वही लड़की — आग के बीच खड़ी थी।
उसका लहंगा जल रहा था।
वह चिल्ला रही थी।
"मुझे बचाओ!"
लेकिन कोई वापस नहीं आया।
सब अपनी जान बचाकर भाग गए।
उसकी आंखों में जो भाव था…
वह दर्द से ज्यादा विश्वासघात का था।
दृश्य टूट गया।
रुद्र फिर अपने कमरे में था।
दुल्हन अब बिल्कुल सामने खड़ी थी।
उसकी आवाज धीमी थी, लेकिन उसमें सदियों का क्रोध भरा था।
"उन्होंने मुझे छोड़ दिया… दूल्हे ने भी। उसने दरवाजा बाहर से बंद कर दिया… ताकि आग अंदर ही रहे।"
कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया।
फिर उसने पूछा —
"बताओ… क्या मैं गलत हूँ?"
रुद्र ने बिना झिझक कहा, "गलत? हां।"
कमरा अचानक ठंडा हो गया।
दुल्हन की आंखें सिकुड़ गईं।
"तुम मुझे जज कर रहे हो?"
रुद्र की आवाज शांत थी।
"जिन्होंने तुम्हें मारा… उन्हें मारना गलत नहीं था। लेकिन जो लोग इस बिल्डिंग में मरे… वे तुम्हारी शादी में नहीं थे।"
दुल्हन का चेहरा विकृत होने लगा।
उसके शरीर से काला धुआं निकलने लगा।
"इंसान सब एक जैसे होते हैं!"
और अगले ही पल —
वह गायब।
रुद्र ने महसूस किया —
खतरा ऊपर से है।
उसने छलांग लगाई।
उसी क्षण छत फट गई।
काले बालों का एक गुच्छा नीचे गिरा।
नहीं…
वह बाल नहीं थे।
वे सुइयों की तरह सख्त हो चुके थे।
फर्श में धंस गए।
अगर रुद्र एक पल भी देर करता…
वे उसके शरीर को भेद देते।
दुल्हन हवा में तैर रही थी।
अब उसका शरीर पूरी तरह बदल चुका था।
उसकी पीठ से छह लंबे, हड्डियों जैसे उभार निकले हुए थे।
"तुम मुझे समझ नहीं सकते… तुम भी मरोगे… सब मरते हैं!"
रुद्र ने गंडासा घुमाया।
लेकिन इस बार वह सीधे हमला करने नहीं गया।
वह इंतजार कर रहा था।
दुल्हन झपटी।
यही मौका था।
रुद्र ने अपनी प्राण ऊर्जा को एक बिंदु पर केंद्रित किया।
काल-भैरव विद्या का दूसरा रूप।
उसकी आंखों की पुतलियां हल्की लाल चमकने लगीं।
जैसे समय एक पल के लिए धीमा हो गया हो।
दुल्हन की गति अब पढ़ी जा सकती थी।
उसने साइड स्टेप लिया।
और गर्दन की ओर वार किया।
धार आर-पार चली गई।
एक भयानक चीख गूंजी।
लेकिन…
दुल्हन मरी नहीं।
बल्कि उसने रुद्र का हाथ पकड़ लिया।
उसकी पकड़ इस बार असंभव रूप से मजबूत थी।
रुद्र ने महसूस किया —
उसकी उम्र खिंच रही है।
सिस्टम चमका —
Lifespan draining.
Remaining: 362 days… 361… 360…
पहली बार रुद्र के माथे पर पसीना आया।
"यह सीधे उम्र खा रही है…"
दुल्हन मुस्कुराई।
"अब समझे? मैं सिर्फ शरीर नहीं मारती… समय खा जाती हूँ।"
रुद्र के घुटने हल्के झुकने लगे।
अगर यह कुछ सेकंड और चला…
तो वह बूढ़ा होकर यहीं गिर जाएगा।
उसने तुरंत फैसला लिया।
"सिस्टम… प्राण ओवरड्राइव."
Confirm?
Cost: 30 years lifespan.
रुद्र ने बिना सोचे कहा, "Confirm."
अगले ही पल —
उसके शरीर से विस्फोट जैसी ऊर्जा निकली।
कमरे की खिड़कियां चटक गईं।
दीवारों में दरारें पड़ गईं।
दुल्हन की पकड़ ढीली हुई।
रुद्र की नसें उभर आईं।
उसकी आंखें अब पूरी तरह लाल थीं।
उसने गंडासा दोनों हाथों से पकड़ा।
और एक ही वार में…
दुल्हन का आधा शरीर अलग कर दिया।
इस बार चीख अलग थी।
उसमें डर था।
दुल्हन पीछे हटने लगी।
"तुम… इंसान नहीं हो…"
रुद्र भारी सांस लेते हुए बोला,
"नहीं… मैं शिकारी हूँ।"
वह आगे बढ़ा।
दुल्हन जमीन पर तड़प रही थी।
उसका शरीर धुएं में बदलने लगा।
सिस्टम चमका —
Elite Spirit collapsing.
Prana ready for extraction.
रुद्र झुका।
जैसे ही उसने ऊर्जा खींचनी शुरू की…
उसे अचानक कुछ अजीब महसूस हुआ।
यह प्राण सामान्य नहीं था।
इसमें…
कई आवाजें थीं।
रोना।
चीखें।
फुसफुसाहट।
और फिर —
एक साफ शब्द।
"भागो…"
रुद्र की आंखें फैल गईं।
"क्या?"
अचानक दुल्हन ने उसका हाथ पकड़ लिया।
उसका चेहरा अब शांत था।
पहली बार… बिना क्रोध के।
वह फुसफुसाई —
"मैं सबसे बड़ी नहीं हूँ…"
कमरे के बाहर…
गलियारे में…
धीरे-धीरे…
कदमों की आवाज आने लगी।
ठक…
ठक…
ठक…
जैसे कोई भारी चीज घसीटते हुए चल रहा हो।
सिस्टम अचानक लाल हो गया —
Catastrophic threat detected.
रुद्र ने दरवाजे की ओर देखा।
दरवाजा अपने आप खुलने लगा।
अंधेरे गलियारे में…
दो बेहद ऊंची परछाइयां खड़ी थीं।
कम से कम आठ फीट।
और उनकी आंखें…
एक साथ खुलीं।
"जो दरवाज़े के बाहर खड़ा था"
दरवाज़ा पूरी तरह खुल चुका था।
गलियारे का अंधेरा कमरे के अंदर बहता हुआ सा महसूस हो रहा था। वह सामान्य अंधेरा नहीं था — उसमें एक गहराई थी, जैसे रोशनी उसमें घुसकर लौटना भूल जाए।
रुद्र धीरे-धीरे सीधा खड़ा हुआ।
उसकी हथेली अभी भी उस टूटी हुई दुल्हन की प्राण ऊर्जा से झनझना रही थी। लेकिन उसका ध्यान अब पूरी तरह दरवाज़े पर था।
दो परछाइयाँ।
लंबी।
असामान्य रूप से स्थिर।
और सबसे डरावनी बात — वे हिल नहीं रही थीं, फिर भी ऐसा लग रहा था जैसे हर सेकंड पास आ रही हों।
फर्श पर पड़ी दुल्हन ने कांपती आवाज में कहा,
"वे आ गए…"
रुद्र की नजर एक पल के लिए उसकी ओर गई।
"कौन?"
उसने जवाब नहीं दिया।
उसका शरीर तेजी से धुएं में बदल रहा था। प्राण ऊर्जा बिखर रही थी, जैसे कोई अदृश्य शक्ति उसे खींच रही हो।
सिस्टम चमका —
Warning.
Higher Order Entities detected.
Immediate absorption recommended.
रुद्र ने देर नहीं की।
उसने हाथ आगे बढ़ाया और बची हुई प्राण ऊर्जा को खींच लिया।
जैसे ही ऊर्जा उसके शरीर में दाखिल हुई, एक झटका सा लगा।
यह ऊर्जा अलग थी।
गहरी।
भारी।
उसके दिमाग में एक साथ कई दृश्य चमके — आग, चीखें, टूटा हुआ मंडप, बंद दरवाज़ा, जलती हुई सांस…
और फिर सब शांत।
सिस्टम की आवाज बदली।
Prana absorbed.
Lifespan increased.
Remaining lifespan: 412 days.
रुद्र ने धीमी सांस छोड़ी।
लगभग पचास दिन।
एक लड़ाई… और पचास दिन।
उसकी आंखों में चमक आई।
लेकिन वह चमक ज्यादा देर टिक नहीं पाई।
क्योंकि गलियारे से आती ठंड अब उसकी हड्डियों तक उतर रही थी।
ठक…
ठक…
ठक…
आवाज़ फिर आई।
इस बार साफ।
जैसे कोई भारी धातु जमीन पर घसीट रहा हो।
पहली परछाईं धीरे-धीरे रोशनी की सीमा में आई।
और रुद्र की पुतलियां सिकुड़ गईं।
वह इंसान जैसा था।
लेकिन अनुपात गलत थे।
हाथ बहुत लंबे।
घुटने उल्टी दिशा में मुड़े हुए।
त्वचा… नहीं थी।
उसका पूरा शरीर काले, चमकदार मांस जैसा दिख रहा था — जैसे त्वचा उतार दी गई हो।
चेहरा सपाट।
नाक नहीं।
होंठ नहीं।
सिर्फ एक लंबी दरार… जहां से हल्की सफेद भाप निकल रही थी।
और आंखें।
पूरी तरह दूधिया।
बिना पुतलियों के।
दूसरी आकृति उससे भी ऊंची थी।
उसका सिर छत से टकरा रहा था।
उसके हाथ में कुछ था।
रुद्र ने ध्यान से देखा।
वह एक विशाल लोहे की कील थी।
इतनी बड़ी… कि किसी इंसान के आर-पार जा सके।
सिस्टम अचानक तेज ध्वनि के साथ चमका —
Gravekeepers identified.
Threat Level: Unknown.
Recommended action: Do Not Engage.
रुद्र ने धीरे से बुदबुदाया,
"ग्रेवकीपर… कब्रों के रखवाले?"
पहली आकृति ने सिर झुकाया।
जैसे उसने सुन लिया हो।
फिर…
उसकी गर्दन से एक आवाज निकली।
सूखी।
घिसी हुई।
"ऊर्जा… चोरी…"
दूसरी ने कील को फर्श पर घसीटा।
चिंगारियां उभरीं।
"नियम… भंग…"
रुद्र समझ गया।
वे दुल्हन के लिए नहीं आए थे।
वे उसके लिए आए थे।
क्योंकि उसने एक ऐसी आत्मा की ऊर्जा ले ली थी… जो शायद उनके अधिकार क्षेत्र में थी।
कमरे की दीवार पर टंगी घड़ी अचानक गिर गई।
समय — रात के 8 बजकर 44 मिनट।
लेकिन सेकंड की सुई उल्टी दिशा में घूमने लगी।
रुद्र ने तुरंत प्राण ऊर्जा सक्रिय की।
उसकी इंद्रियां तेज हो गईं।
दिल की हर धड़कन अब साफ सुनाई दे रही थी।
पहला ग्रेवकीपर अंदर आया।
उसके कदमों की आवाज नहीं थी।
फिर भी हर कदम पर फर्श हल्का धंस रहा था।
"ऊर्जा… लौटाओ…"
रुद्र ने गंडासा उठाया।
"ले सकते हो… तो ले लो।"
कुछ पल के लिए सन्नाटा छाया।
फिर—
ग्रेवकीपर गायब।
रुद्र की गर्दन के पीछे अचानक ठंडक दौड़ी।
वह झुका।
एक काली भुजा उसके सिर के ऊपर से गुजरी।
गति इतनी तेज थी कि हवा कटने की आवाज आई।
रुद्र घूमकर वार किया।
धार उस चीज के धड़ से टकराई।
टन्न!
जैसे पत्थर पर लगी हो।
कोई कट नहीं।
कोई निशान नहीं।
"मजबूत…"
उसने मन ही मन सोचा।
अगले ही पल एक जोरदार झटका लगा।
ग्रेवकीपर का हाथ उसके सीने से टकराया।
रुद्र पीछे फेंका गया।
दीवार से टकराया।
प्लास्टर टूटकर गिरा।
कुछ सेकंड तक उसकी सांस अटक गई।
सिस्टम चमका —
Internal damage detected.
रुद्र खड़ा हुआ।
उसकी पसलियों में दर्द था।
लेकिन उसकी आंखों में अब शिकार वाली शांति नहीं थी।
अब वहां गणना थी।
"सीधी ताकत से नहीं होगा…"
दूसरा ग्रेवकीपर भी अंदर आ चुका था।
उसने धीरे से कील उठाई।
और बिना चेतावनी…
फेंक दी।
रुद्र साइड में कूदा।
कील दीवार में धंस गई।
पूरा आधा हिस्सा अंदर।
अगर वह लगती…
तो शरीर दीवार से चिपक जाता।
रुद्र ने तुरंत फैसला लिया।
लड़ना = मौत।
भागना = मौका।
वह दरवाज़े की ओर दौड़ा।
पहला ग्रेवकीपर सामने आ गया।
रुद्र नीचे फिसला।
उसके पैरों के बीच से निकल गया।
गलियारे में पहुंचते ही उसे एहसास हुआ —
यह वही बिल्डिंग नहीं लग रही।
गलियारा लंबा था।
बहुत लंबा।
जितना होना चाहिए… उससे कई गुना।
पीछे कदमों की आवाज नहीं आ रही थी।
फिर भी…
वे पीछे थे।
रुद्र दौड़ता रहा।
एक दरवाज़े के पास से गुजरा।
फिर दूसरे से।
फिर उसने देखा —
हर दरवाज़े पर एक लाल हथेली का निशान था।
उसे अचानक बीहड़ वाले गांव की बात याद आई।
ठीक उसी तरह के निशान।
"यह सब जुड़ा हुआ है…"
अचानक सामने का बल्ब फूटा।
कांच बिखरा।
और रोशनी में…
एक तीसरी आकृति खड़ी थी।
यह ग्रेवकीपर नहीं था।
यह कुछ और था।
एक छोटा बच्चा।
लगभग सात साल का।
स्कूल यूनिफॉर्म में।
सिर झुका हुआ।
हाथ में एक लाल गुब्बारा।
रुद्र धीमा पड़ा।
बच्चे ने सिर उठाया।
उसकी आंखें पूरी तरह काली थीं।
फिर उसने पूछा —
"क्या आपने मेरी मम्मी को देखा है?"
पीछे…
दोनों ग्रेवकीपर गलियारे में मुड़ चुके थे।
आगे यह बच्चा।
रुद्र समझ गया।
यह बिल्डिंग… सिर्फ एक शिकारगाह नहीं।
यह एक दरवाज़ा है।
और वह…
शायद उसे खोल चुका है।
बच्चा मुस्कुराया।
उसके होंठ जरूरत से ज्यादा फैल गए।
"आपसे… मौत की गंध आ रही है।"
रुद्र ने गंडासा फिर से कसकर पकड़ा।
उसने धीरे से कहा,
"अच्छा है… क्योंकि मैं अभी मरने वाला नहीं हूँ।"
उसी क्षण…
पूरा गलियारा अंधेरे में डूब गया।